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हम, हमारी कानून व्यवस्था और समाज

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   हम, हमारी कानून व्यवस्था और समाज स्वतंत्र भारत में निवास करता हुआ प्रत्येक नागरिक वर्तमान समय में न तो पूर्णतया सुरक्षित है न हीं लोकतंत्र के महत्त्व से फलीभूत हो पाया है । लोकतंत्र के निर्माण के पीछे एक मात्र मकसद था देश में शांति भाईचारा ,एकता और प्रेम के अतिरिक्त राज्यों के सीमाओं से परे , भाषाओँ और भिन्न धर्मो को मिलकर रहना ।परन्तु यथार्थ तो बिलकुल अलग ही है ।वर्तमान समय में एक तरफ़ जाति , भाषा ,और राज्यों के सीमाओ के नाम पर लड़ाई हो रही है । तो कहीं धर्म के नाम पर कत्लेआम हो रहे हैं ।हर शहर ,मुहल्ला ,गाँव ,और चौक -चौराहों पर सरेयाम लूटपाट ,क़त्ल ,अपहरण और बलात्कार जैसी घटनाये आये दिन होते रहते है । ऐसे में हम कहाँ तक सुरक्षित हैं और कैसे हम लोकतंत्र के कानून व्यवस्था पर विश्वास करें ?विश्व की सबसे विशाल लोकतंत्र में समाज के आम जनता जो कानून के सहारे जीवन जीने का प्रयास कर रहा है वह ही इस भ्रष्ट और आतंकित माहौल में असुरक्षित महसूस करने लगा है । संविधान की व्यवस्था में कहाँ चूक बाकि रह गयी जो हमें हमारी कानून व्यवस्था पर से विश्वास हटने लगा ।क्योंकि दिन हो या रात ,स्त्री हो...

Social problems of India and its solutions (निबंध in हिंदी)

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  भारत की सामाजिक समस्याएँ और उनके समाधान   भारत सवा सौ करोड़ वाला विश्व का सबसे विशाल लोकतंत्र का देश है | हमारा देश अनेकता में एकता और अखंडता को स्थापित कर विश्व के लिए एक मिशाल बन चुका है | अनेक सामाजिक बुराईयों और समस्याओं को झेलते हुए हम नित नए आयाम   की ओर अपने कदम बढ़ाते जा रहे हैं | भिन्न भिन्न जाति और भाषा के लोग एक साथ इस भारत भूमि को मिलकर विकास की ओर ले जाने में अपना योगदान दे रहे हैं | परन्तु फ़िर भी भारत की अनेक़ सामाजिक समस्याएँ जो प्राचीन समय से हमारे विकास यात्रा में बाधा बनी है वो आज भी नागफनी बन कर समय समय पर विकास के रथ को रोक देती हैं | हम निरंतर नए पुराने रीती रिवाजों के नाम पर या   कभी प्राकृतिक प्रकोप के रूप में तो कभी गरीबी , भुखमरी के रूप में अनेक समस्यायों से जूझते रहते हैं | इससे भारत के विकास प्रक्रिया तो धीमी पड़ती हीं है साथ में मानवता और अनेक संवेदनाओं का भी हनन करती है | २१वीं सदी के इस आधुनिक और अंकदर्शी युग में जहाँ विश्व के अनेक देश हमसे प्रतिष्पर्धा रखते हैं और हम शायद कहीं न कहीं तेजी से विकासशील देश से विकसित देश बनने की ओ...

Learn to write Hindi essay in easy process

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    निबंध लेखन    निबन्ध साहित्य का एक स्वतंत्र अंग है। हिंदी का निबंध शब्द अंग्रेजी के ESSAY शब्द का अनुवाद है जो फ्रेंच के Essai से बना है जिसका अर्थ है - To attempt अर्थात् प्रयास करना। आज हम इसी विषय से संबंधित विशेष जानकारी प्राप्त करेंगे जिसमें प्रमुख हैं -.. .  निबन्ध क्या है? . निबन्ध कितने प्रकार के होते हैं? . निबन्ध लेखन कैसे सीखें? . निबन्ध की शैली? निबंध क्या है ? निबंध आत्म अभिव्यक्ति वह सहज साधन है जहां निबंधकार अपने सहज स्वाभाविक भावों को अपने पाठकों तक पहुंचता है। फ्रांस के  मौंतेन  को आधुनिक निबंध का जन्मदाता माना जाता है। परिभाषा :-  निबंध  विचारों, उद्धरणों एवं कथाओं का सम्मिश्रण है । निबंध के प्रकार :- निबंध मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं - 1 . भावात्मक 2. विचारत्मक 3. वर्णनात्मक   भावात्मक निबंधों में भावों की प्रधानता होती है और विचारात्मक निबंध में विचारों की प्रमुखता होती है।परंतु कोई भी निबंध केवल भाव या केवल विचार के सहारे नहीं लिखा जाता है। वह अपने साथ साथ भाव और विचार दोनों लेकर चलती है लेकिन जिस पक्ष की...

Reservation policy in India and its disadvantages

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  आरक्षण  आरक्षण का अर्थ है चारों ओर से रक्षा करना। बिना किसी जाति, धर्म और सांप्रदायिक भेदभाव के एक समान संरक्षण प्रदान कर सभी वर्गों को सामूहिक विकास का अवसर प्रदान कर देश की सामान्य जनता को विकास की ओर अग्रसर करना। एक कुशल शासक अपने देश की प्रत्येक जनता को समभाव से विकास की ओर प्रेरित कर अपनी दूरदर्शिता और विवेकपूर्ण निर्णय से अमीरी-गरीबी के बढ़ते दरार को समाप्त कर एक निश्चित, सीमा तय करता है। जिसमें 'उसके देश के सभी नागरिक खुशहाल जीवन यापन कर सकें। आरक्षण शब्द का प्रयोग देश में सर्वप्रथम लार्ड मिंटो ने 1909 में भारत शासन अधिनियम के अंतर्गत किया था। जिसके अनुसार भारत के कुछ वर्गों को निर्वाचन में पृथक प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई थी। इसके पश्चात आरक्षण शब्द का प्रचार-प्रसार दिन-ब-दिन बढ़ता चला गया। स्वाधीनता के पश्चात हमारे संविधान निर्माताओं ने महात्मा गांधी व अन्य समाज सुधारकों के प्रयत्नों से प्रभावित होकर स्वतंत्र भारत के संविधान में देश की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के उत्थान हेतु अनेक प्रावधानों का समावेश किया। भारत के संविधान में अनुसूचित जातियों तथा अ...